भारत में बिजली का इतिहास: कई लोग अभी भी अंधेरे में रहते हैं

फ़रवरी 10, 2016
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electricity-in-india-many-still-live-in-darkness-orig-20160209एन आर्बर-भारत ने लोगों को बिजली पहुचाँने में प्रगति की है, लेकिन देश के उपग्रह चित्र दिखाते है कि कुछ स्थानीय सरकारों ने सफलता को कुछ बढ़ा चढ़ाकर कहा है।

मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ब्रायन मिन ने उपग्रह द्वारा भारत में पिछले 20 वर्षों में हर रात लिये गये हजारों छवियों के विश्लेषण के बाद कहा है।

उनके विशाल प्राजेक्ट ने 8000 रातों में छह लाख से ज्यादा गांवों से आने वाली रोशनी की उपग्रहों से ली गई तस्वीरों और 4.4 अरब डेटा बिंदुओं की
ट्रैकिंग कर के विश्लेषण किया है।

उनका विशाल परियोजना कैसे उपयोग और बिजली के उपयोग देश भर में बदलता अध्ययन करने के लिए 8000 रातों से अधिक से अधिक 600,000 गांवों की प्रकाश उत्पादन शामिल किया गया है।

“भारत ने पिछले दो दशकों में काफी प्रगति की है, लेकिन अभी भी विशाल क्षेत्र अंधेरे में रह रहे हैं,” मिन ने कहा, जो यू-एम के राजनीति विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं।

पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में कई ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल किया है और बहुत उज्जवल बन गए हैं। लेकिन झारखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार जैसे अन्य राज्यों में इन दशकों में थोड़ा ही सुधार आया है।

मध्य प्रदेश ने दावा किया है कि उसके ज्यादातर गांवों को 2011 तक विद्युतीकरण किया गया था लेकिन रात को उपग्रहों द्वारा ट्रैक की गई रोशनी कुछ अलग कहानी बताती हैं। वो दिखाते हैं कि मध्य प्रदेश में उच्चतम इंट्रा-राज्य बदलाव हैं, और कई जिलों में, जो आदिवासी क्षेत्रों में हैं, अभी भी अंधेरा है।

झारखंड जहाँ 2015 तक 95 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण का दावा किया गया है, लेकिन मैप क्रमिक विद्युतीकरण दिखाता हैं जिसमे रात की रोशनी ज्यादातर शहरी क्षेत्रों से आ रही है।

हरदोई, उत्तर प्रदेश में एक शहर के चारों ओर प्रकाश उत्पादन में वृद्धि देख सकते हैं जब राज्य के ऊर्जा मंत्री 1998-2001 को वहाँ से चुना गया था। लेकिन 2001 में कैबिनेट मंत्री के पद को छोड़ने पर, निर्वाचन क्षेत्र से प्रकाश उत्पादन में भी कटौती हुई।

‘भारत में विद्युतीकरण जैसे मुद्दों राजनीतिक महत्व के आधार पर चलते हैं,” मिन ने कहा।

परिणाम विश्व बैंक, यूएस नैशनल ओशिएनिक ऐंड ऐटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ऐंड डिवलपमेंट सीड की साझेदारी से बनाई गई वेबसाइट नाइटलाइट्सडॉटआईओ पर डाला गया है। इसके जरिए प्रयोगकर्ता राज्य और जिला स्तर पर जूम करके देख सकते हैं और उन्हें पिछले दो दशकों में आए बदलाव दिखेंगे।

“यहां तक कि एक ग्रामीण व्यक्ति भी इन नक्शों को देख कर जान सकता है कि बिजली से होने वाली रोशनी ने उसके गांव पर किस तरह से असर डाला है,” मिन ने कहा।

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