मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताअों ने दुनिया का सबसे छोटा ‘कंप्यूटर’ बनाया

अगस्त 9, 2018
Contact: Mandira Banerjee mandirab@umich.edu

Grain of rice next to tiny computer.

एन आर्बर: वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा कंप्यूटर विकसित किया है। यह एक ऐसा कंप्यूटर है जो सिर्फ 0.3 मिलीमीटर का है अौर चावल के दाने से भी छोटा है।

और यह कैंसर का पता लगाने और उसके इलाज के नए दरवाजे खोलने में मदद कर सकता है। इससे पहले वाली सिस्टम 2x2x4 मिलीमीटर मिशिगन माइक्रो मोट सहित अन्य कंप्यूटर तब भी अपनी प्रोग्रामिंग और डेटा को सुरक्षित रख सकता है, जब वह आंतरिक रूप से चार्ज न हो। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के वैज्ञानिकों ने ये कारनामा किया है।

किसी एक डेस्कटॉप के चार्जर के प्लग को निकालें तो उसके डेटा और प्रोग्राम तब भी उपलब्ध रहते हैं। जब बिजली वापस आती हैं तो वे खुद को बुट कर लेते हैं। इन नए सुक्ष्म डिवाइस में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। ये छोटे कंप्यूटर जैसे ही डिस्चार्ज होंगे इनकी प्रोग्रामिंग और डेटा समाप्त हो जाएंगे।

मिशिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेविड ब्लाऊ ने कहा, ” हम इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि इन्हें कंप्यूटर कहा जाना चाहिए या नहीं। यह एक राय की बात है कि इनमें कंप्यूटर की तरह न्यूनतम फंक्शन वाली चीजें हैं या नहीं।”

रैम और फोटोवोल्टिक्स के अलावा, नए कंप्यूटिंग उपकरणों में प्रोसेसर और वायरलेस ट्रांसमीटर और रिसीवर होते हैं। क्योंकि वे पारंपरिक रेडियो एंटीना के लिए बहुत छोटे होते हैं, वे प्रकाश के साथ डेटा प्राप्त करते हैं और संचारित करते हैं। एक बेस स्टेशन बिजली और प्रोग्रामिंग के लिए लाइट प्रदान करता है, और यह डेटा प्राप्त करता है।

प्रणाली बहुत लचीला है और विभिन्न उद्देश्यों के लिए फिर से बनाई जा सकती है, लेकिन टीम ने ऑन्कोलॉजी के लिये सटीक तापमान माप का चयन किया। उनके लंबे सहयोगी, गैरी लूकर, जो रेडियोलॉजी और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं, ट्यूमर में तापमान के बारे में सवालों के जवाब चाहते हैं।

इस कंप्यूटर से कई तरह के काम लिए जा सकते हैं और इसका इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इसे बनाने वाली टीम ने इसका इस्तेमाल तापमान मापदंड के स्पष्टता के लिए करने तय किया। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि सामान्य उत्तक से ट्यूमर ज्यादा गर्म होते हैं। इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। तापमान से कैंसर के इलाज का पता लगाने में भी मदद मिल सकता है।

“चूंकि तापमान सेंसर छोटा और जैव-अनुकूल है, हम इसे माउस में लगा सकते हैं और कैंसर की कोशिकाएं इसके चारों ओर बढ़ सकते हैं,” ल्यूकर ने कहा। “हम इस तापमान सेंसर का उपयोग करके सामान्य टिशू अौर ट्यूमर के बीच तापमान में भिन्नता की जांच कर सकते हैं।”

और वह डिवाइस, मिशिगन माइक्रो मोटे, दुनिया के सबसे छोटे कंप्यूटर के रूप में भी हो सकता है, फिर भी समुदाय के निर्णय के आधार पर कंप्यूटर की न्यूनतम आवश्यकताएं होती हैं।

एक छोटा कंप्यूटर कितना अच्छा है? मिशिगन माइक्रो मोटे के प्रयोग:

  •     ग्लूकोमा निदान के लिए आंख के अंदर दबाव संवेदना
  •    कैंसर अध्ययन
  •    तेल जलाशय निगरानी
  •    बायोकेमिकल प्रक्रिया की निगरानी
  •    निगरानी: ऑडियो और दृश्य
  •    छोटे घोंघा अध्ययन

अध्ययन 21 जून को वीएलएसआई टेक्नालजी और सर्किट 2018 संगोष्ठी में प्रस्तुत किया गया था। पेपर का शीर्षक “ए 0.04 मिमी 3 16 एनडब्ल्यू वायरलेस और बैटरीलेस सेंसर सिस्टम समेकित कॉर्टेक्स-एम 0 + प्रोसेसर और सेलुलर तापमान मापन के लिए ऑप्टिकल संचार है।”

यह काम म्यू फुजित्सु सेमीकंडक्टर लिमिटेड जापान और फुजीत्सु इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका इंक के सहयोग से किया गया था।

अधिक जानकारी:

डेविड ब्लौउ
डेनिस सिल्वेस्टर
जेमी फिलिप्स
वीएलएसआई प्रौद्योगिकी और सर्किट पर 2018 संगोष्ठी