प्राचीन शार्क प्रागैतिहासिक नदी डेल्टा नर्सरी में युवा को पाला

जनवरी 7, 2014
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Bandringa के एक कलाकार का प्रतिपादन, एक 310 मिलियन साल पुराने शार्क मूल रूप से Mazon क्रीक, इलिनोइस से जीवाश्म जमा में पाया. मिशिगन जीवाश्म विज्ञानी लॉरेन Sallan विश्वविद्यालय और एक सहयोगी नीचे खिला शिकारी उथले तटीय जल में अंडे सागर के लिए चले गए और जल्द से जल्द पता शार्क नर्सरी में से एक के जीवाश्म सबूत के पीछे छोड़ दिया है कहना. जॉन Megahan, मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा चित्रकारी.Bandringa के एक कलाकार का प्रतिपादन, एक 310 मिलियन साल पुराने शार्क मूल रूप से Mazon क्रीक, इलिनोइस से जीवाश्म जमा में पाया. मिशिगन जीवाश्म विज्ञानी लॉरेन Sallan विश्वविद्यालय और एक सहयोगी नीचे खिला शिकारी उथले तटीय जल में अंडे सागर के लिए चले गए और जल्द से जल्द पता शार्क नर्सरी में से एक के जीवाश्म सबूत के पीछे छोड़ दिया है कहना. जॉन Megahan, मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा चित्रकारी.एन आर्बर: सामन मछली के विपरित, लंबी थूथन वाला बदरिंगा शार्क 310 मिलियन वर्ष पहले अंडे देने के लिए मीठे पानी के दलदलों को छोड उष्णकटिबंधीय समुद्र तट के लिए जाते थे अौर शार्क नर्सरी का एक जीवाश्म सबूत छोड़ गये हैं।

यह आश्चर्यजनक निष्कर्ष यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के पैलीअन्टालजिसट लॉरेन सालान अौर शिकागो विश्वविद्यालय की सहयोगी ने किया जब उन्होंने बदरिंगा शार्क के सभी ज्ञात नमूनों का विश्लेष किया जो अमेरिका के ऊपरी मिडवेस्ट में फैले एक प्राचीन नदी डेल्टा प्रणाली में रहते थे।

यह नए निष्कर्ष वर्टब्रैट्स पैलीअन्टालजी जर्नल के ऑनलाइन अडिशन में 7 जनवरी को प्रकाशित हुये। यह व्यवहार प्राचीनतम शार्क माइग्रेशन का उदाहरण हैं जो हवाई में टाइगर शार्क के प्रजातियों में के बीच आज तक बनी हुई है।

बदरिंगा शार्क के जीवाश्म जिनकी पुनर्व्याख्या सालान और माइकल कोट्स ने की, यह मीठे पानी से खारे पानी में माइग्रेशन का एकमात्र ज्ञात उदाहरण हैं जहाँ जीवाश्म अंडे और किशोर शार्क एक ही अवसाद में संरक्षित है।

” यह शार्क के माइग्रेशन व्यवहार को अौर पीछे ले जाता हैं,” सालान ने कहा जो यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के पारिस्थितिकीय और विकासवादी जीव विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। “ये शार्क खुले समुद्र में पैदा हुये और बाकी जीवन ताजा पानी में बिताया। आज ऐसा वाले कोई शार्क जिंदा नहीं है। “

लंबे समय से विलुप्त बदरिंगा शार्क आधुनिक शार्क के करीबी रिश्तेदारों में से एक है। बदरिंगा को 1969 में डिस्कवर किया गया और जल्द ही उत्तरी इलिनोइस में प्रसिद्ध मैजोन क्रीक से सबसे बेशकीमती जीवाश्मों में से एक बन गया। अब तक, यह माना जाता था कि बदरिंगा शार्क की दो प्रजातिया हैं एक जो ताजे पानी के दलदल और नदियों में रहते थे अौर एक जो उथले समुद्र में रहते थे।

लेकिन 24 बदरिंगा के जीवाश्मों अौर ढके त्वचा के लेटेक्स ” छिलके ” के मूल्यांकन के बाद , सालान और कोट्स ने कहा कि ताजा ,और नमक पानी के बदरिंगा एक ही प्रजाति हैं।

दो कथित प्रजातियों के बीच शारीरिक मतभेद समुद्री और मीठे पानी स्थानों पर विभिन्न संरक्षण प्रक्रियाओं के कारण थे , सालान और कोट्स ने कहा। मीठे पानी के साइटों में हड्डियों और उपास्थि को प्रज़र्व्ड किया गया अौर समुद्री साइटों में नरम ऊतक का संरक्षित हुआ।

दोनों जीवाश्म साइटों को जोडकर विलुप्त शार्क की शारीरिक रचना का एक पूरा तस्वीर प्राप्त हुआ।

सालान और कोट्स ने कहा कि किशोर बदरिंगा शार्क मैजोन क्रीक के अंडे से निकले जहाँ समुद्री साइटों में मादा शार्क ने अंडे दिये और फिर ताजे पानी नदियों और दलदलों में लौट गई।

“यह अंडा मामलों और बच्चों दोनों पर आधारित है कि एक शार्क नर्सरी का पहला जीवाश्म सबूत है , ” सालान ने कहा। “यह सबूत है कि किशोरों और वयस्कों विभिन्न स्थानों में रह रहे थे और इन नर्सरी पानी में से माइग्रेशन करते थे। “

इलिनोइस राज्य संग्रहालय के अनुसार , मैजोन क्रीक जमा में 320 से अधिक जानवरों की प्रजातियों की पहचान की गई हैं जो अच्छी तरह से संरक्षित है।

उन में से कई जानवर उथले समुद्री खण्ड में रहते थे। अन्य पौधों और जानवरों नदियों के किनारे दलदली क्षेत्रों में रहते थे जो खाड़ी में खुलते थे। इन सभी पौधों और जानवरों के अवशेष जब खाड़ी के नीचे डूबे तो तेजी से कीचड़ ने उन्हें दफनाया जिससे वो संरक्षित हुये।

परियोजना के लिए वित्तीय सहायता राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन , शिकागो विश्वविद्यालय , यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन और मिशिगन अध्येताओं की सोसाइटी द्वारा प्रदान किया गया।